विभागीय उपलब्धियां

वर्ष 2016-17 में खान एवं भूतत्व विभाग की महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ

1. समाहरण
  खान एवं भूतत्व विभाग, बिहार, पटना द्वारा वित्तीय वर्ष 2007-08 से लगातार राजस्व वसूली में बढ़़ोत्तरी कर रहा है. वित्तीय वर्ष 2016-17 में वित्त विभाग द्वारा निर्धारित लक्ष्य 1100.00 करोड़ रूपये के विरूद्ध माह मार्च 2017 तक 99,410.19 लाख रूपये की वसूली की जा चुकी है.
2. लघु खनिज
 
(क) पत्थर के खनन पट्टे - वर्तमान में कुल 4 खनन पट्टे बिहार लघु खनिज समनुदान नियमावली 1972 के नियम 9 के अनुसार पूर्व के स्वीकृत है, जिसमें से वित्तीय वर्ष 2019-20 में 3 एवं वित्तीय वर्ष 2020-21 में 1 खनन पट्टा की अवधि समाप्त हो जाएगी. नए बंदोबस्ती के क्रम में अब तक बिहार राज्य के 5 जिलों (गया-9, नवादा-17, शेखपुरा-13, औरंगाबाद-2, बांका-1 एवं कैमूर-1) में कुल 43 पत्थर खनन पट्टों की लोक नीलामी के माध्यम से बंदोबस्ती की गयी है. पांच वर्षो हेतु बंदोबस्ती राशि कुल 755.65 करोड़ रूपये है. माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायादे दिनांक 27.02.12 (दीपक कुमार इत्यादि वनाम हरियाणा राज्य सरकार एवं अन्य) के अनुपालन में बिहार लघु खनिज समनुदान (संशोधित) नियमावली, 2014 तथा बिहार लघु खनिज समनुदान नियमावली, 1972 द्वारा राज्य के विभिन्न जिलों में पत्थर भूखण्डों की लोक नीलामी द्वारा 5 हेक्टेयर या उससे अधिक क्षेत्र के लिए खनन पट्टों के बंदोवस्ती कराने की कार्रवाई की गई है। न्यायादे के आलोक मे पत्थर खनन पट्टों की बन्दोबस्ती हेतु खनन योजना एवं पर्यावरण स्वीकृति को अनिवार्य बनाया गया है.
(ख) बालू - माननीय सर्वोच्य न्यायालय द्वारा दिनांक 27.02.2012 को दीपक कुमार वनाम् हरियाणा सरकार एवं अन्य से संबंधित मामले में पारित न्यायादे के आलोक में खान एवं भूतत्व विभाग द्वारा नयी बालू नीति तैयार कर अधिसूचना संख्या-2214/एम दिनांक 27.08.2013 द्वारा अधिसूचित किया जा चुका है. साथ ही बिहार लघु खनिज समनुदान नियमावली, 1972 में आवश्यक संशोधन वर्ष 2014 में की गई है.
 
बालूघाटों की बंदोबस्ती पंचांग वर्ष के आधार पर जिलावार एक इकाई के रूप में लोक नीलामी के माध्यम से की जाती है. नई बालू नीति में संशोधन नियमावली निहित प्रावधानों के अनुसार पटना, भोजपुर एवं सारण जिलों को एक इकाई, रोहतास एवं औरंगाबाद जिलों को एक इकाई तथा जमुई एवं लखीसराय जिलों को एक इकाई के रूप में बंदोबस्ती का प्रावधान किया गया है.
बिहार राज्य के 29 जिलों में बालू खनिज उपलब्ध है. इन जिलों को 25 बालूघाट इकाईयों के रूप में संगठित किया गया है.
लखीसराय, जमुई एवं सहरसा जिला के बालू बन्दोबस्तधारी द्वारा बन्दोबस्ती छोडे जाने के कारण नये सिरे से बन्दोबस्ती की कार्रवाई की गयी है. पूर्णियाँ एवं गोपालगंज जिला का बालू बंदोबस्ती नये सिरे से की जा रहीहै.
पंचांग वर्ष 2019 तक के लिए प्रत्येक वर्ष की बंदोबस्ती राशि का निर्धारण गत् वर्ष की बंदोबस्ती राशि में 20 प्रतिशत जोड़ कर निर्धारित करने का प्रावधान किया गया है.
प्रत्येक बंदोबस्तधारी के लिए राज्य सरकार से खनन योजना (माईनिंग प्लान) अनुमोदित कराकर तथा सक्षम प्राधिकार से निर्गत पर्यावरणीय स्वीकृति समर्पित करना अनिवार्य है.

नई बालू नीति तथा बिहार लघु खनिज समनुदान (संशोधन) नियमावली, 2014 के प्रावधानों के तहत बालूघाटों की बंदोवस्ती पंचांग वर्ष 2015 से 2019 (5 वर्षो) के लिए लोक नीलामी के माध्यम से की गई है.

माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 27.02.2012 को SLP(C)19629/2009 में पारित न्यायादेश के अन्तर्गत पर्यावरण संरक्षण तथा वैज्ञानिक ढंग से खनन कार्य हेतु निम्न दिशा-निर्देश निर्गत किये गये है.

पर्यावरणीय स्वीकृति की अनिवार्यता
माईनिंग प्लान की अनिवार्यता
खनन पट्टा का न्यूनतम क्षेत्रफल- 5 हेक्टेयर
खनन पट्टा की न्यूनतम अवधि- 5 वर्ष
बालू बंदोबस्ती हेतु नदीवार स्ट्रेच का निर्माण
बालू उत्खनन से संबंधित प्रतिबंधित क्षेत्र का निर्धारण
(ग) ईंट-भट्ठा:- बिहार में ईंट सत्र 2015-16 में विभिन्न जिलों में स्थायी चिमनी से ईंट का निर्माण कार्य किया गया जिससे 4295.60 लाख रूपये स्वामिस्व के रूप में प्राप्त हुआ. जिलावार विवरणी परिशिष्ट-5 पर द्रष्टव्य है। विभागीय पत्रांक 3009/एम दिनांक 28.11.2016 द्वारा बिहार राज्यान्तर्गत संचालित/कार्यरत ईंट-भट्ठों के मामलों में राजस्व वसूली का प्रभार एवं निर्धारित मापदण्डों के अनुरूप संचालन की शक्ति अंचलाधिकारी को समर्पित किया गया है. प्रशासी विभाग पूर्व की भांति खान एवं भूतत्व विभाग होगा. जिला पदाधिकारी माहवारी समीक्षा बैठक में ईंट-भट्ठों से हुए राजस्व समाहरण एवं अन्य कानूनी पहलूओं के अनुपालन की समीक्षा सभी अंचलाधिकारियों एवं जिला खनन पदाधिकारी के साथ करेंगे.
(घ)

अवैध खनन एवं परिवहनः - अवैध उत्खनन् परिवहन की रोक-थाम के लिए समाहर्ता की अध्यक्षता में प्रत्येक जिला में टास्क फोर्स गठित है. टास्क फोर्स द्वारा नियमित रूप से जाँच /छापेमारी की जाती है. वर्ष 2016-17 में माह फरवरी, 2017 तक 2968 छापामारी की गयी, जिसमें 804 प्राथमिकियाँ दर्ज की गयी है, 218 गिरफ्तारी की गयी एवं 1318.53 लाख रूपये अर्थ दण्ड के रूप में वसूली की गई.

मुख्य सचिव, बिहार तथा पुलिस महानिदेशक, बिहार के संयुक्त हस्ताक्षर से पत्रांक 3536, दिनांक 19.09.14 तथा पत्रांक 330, दिनांक 29.01.15 एवं प्रधान सचिव, खान एवं भूतत्व विभाग की ओर से पत्रांक 4141, दिनांक 04.12.15 पत्रांक 4398, दिनांक 31.12.15, 1815/एम, दिनांक 04.07.16, 404/एम, दिनांक 09.02.16, दिनांक 1242/एम दिनांक 27.04.16 एवं 4106/एम, दिनांक 20.12.2016 द्वारा सभी जिला पदाधिकारी एवं सभी पुलिस अधीक्षक को अवैध खनन के विरूद्ध कार्रवाई करने हेतु निदेशित किया गया है.
पर्यावरण संरक्षण तथा अवैध खनन्, परिवहन एवं भंडारण की बेहतर एवं प्रभावकारी नियंत्रण के उद्देश्य से संशोधित बिहार खनिज (अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण निवारण) नियमावली, 2003 के मुख्य प्रावधान निम्नवत् हैं -
राज्य के बाहर से बोल्डर लाकर भंडारण करने पर प्रतिबंध.
नयी भंडारण अनुज्ञप्ति निर्गत करने पर प्रतिबंध.
3. वृहत खनिज
 

बिहार राज्य में वृहत् खनिज चूनापत्थर के कुल 11 खनन पट्टे धारित है. वर्ष 2015-16 में वृहत् खनिज से कुल 99.06 लाख रूपये स्वामिस्व के रूप में प्राप्त हुआ था. भारत का राजपत्र संख्या-333, दिनांक-10.02.15 द्वारा चूनापत्थर, अभ्रख (Mica), क्वाटर्ज/क्वार्टजाईट एवं सिलिका सैंड खनिज को गौण खनिज घोषित किया गया है.

वृहत खनिज के उत्खनन हेतु जिलावार पट्टों की संख्या
 क्रमांक जिला खनिज  पट्टों की संख्या  रकबा (एकड़ में)
1. रोहतास चूना पत्थर 11 2109.99
    सिलिका 1 8.50
2.  लखीसराय  क्वार्टज/क्वार्टजाईट 1 48.92
  कुल   13 2167.41
4. कोल ब्लॉक
  बिहार राज्य खनिज विकास निगम को (BSMDC एवं JSMDC) झारखण्ड राज्य खनिज विकास निगम के साथ गोवा कोल ब्लॉक 50:50 अनुपात में वर्ष 2013 में आवंटित किया गया है. दोनों निगम द्वारा JVC बनाये जाने की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है.
5. पेट्रोलियम अन्वेषण
 
(क) पूर्णियाँ बेसि- राज्य सरकार द्वारा ONGC को पूर्णियाँ बेसिन के 2537 वर्ग कि.मी. क्षेत्र में हाईड्रोकार्बन की खोज हेतु पूर्वेक्षण अनुज्ञप्ति दी गई थी. Exploratory Well - Rasulganj 1 (Projected Depth 4,200M) एवं Bahadurgunj में वेधन कार्य किया गया परन्तु हाईड्रोकार्बन अनुपलब्ध पाया गया. फलस्वरूप अन्वेषण कार्य बंद कर दिया गया है.
(ख) बेतिया बेसिन - ONGC एवं TATA (Petrodyne) द्वारा बेतिया बेसिन के 2227 वर्ग कि.मी. क्षेत्र तेल एवं प्राकृतिक गैस के लिए अनुज्ञप्ति दी गई थी. ONGC से प्राप्त सूचना के अनुसार उत्साहवर्धक परिणाम प्राप्त नहीं होने के कारण सर्वेक्षण कार्य बंद कर दिया गया है.
6. अन्य उपलब्धियाँ
 
(क) न्यायालय संबंधी मामले -
CWJC - जनवरी-2017 तक CWJC के 40 मामलों में प्रतिशपथ पत्र दायर किया जा सका है.
MJC के कुल 5 मामलों में प्रतिशपथ-पत्र दायर किया जा चुका है.
LPA के 5 मामलों में प्रतिशपथ पत्र दायर किया जा चुका है.
SLP के 10 केस में प्रतिशपथ पत्र दायर किया जा चुका है.
(ख) लधु खनिज के नियत लगान एवं स्वामिस्व दर के पुनरीक्षण (वृद्धि) करने हेतु बिहार लघु खनिज समनुदान नियमावली, 1972 के नियम 26 (1) (क) एवं (ख) की क्रमश: अनुसूची 1 एवं 2 में वर्ष 2012 से प्रभावी दर में संशोधन/वृद्धि की गई है. पुन: लघु खनिजों के नियत लगान एवं स्वामिस्व दर के पुनरीक्षण (वृद्धि) हेतु गठित समिति द्वारा नियमानुकुल कार्रवाई की जा रही है. इसके फलस्वरूप आगे के वर्षो में राजस्व संग्रहण में वृद्धि संभावित है.
(ग) राज्य के अन्तर्गत स्थित विभिन्न क्षेत्रों में असैनिक निर्माण कार्य की स्थिति, औद्योगिक निर्माण कार्य की स्थिति, जनसंख्या स्थिति, शहरीकरण की अवस्था एवं औद्योगिक विकास की गति को ध्यान में रखते हुए विभिन्न क्षेत्रों को श्रेणीयों में विभाजित करते हुए प्रत्येक स्थायी चिमनी एवं बंगला ईंट भट्ठों के लिए ईंटों की संख्या और उस पर ईंट भट्ठा मालिकों/ ईंट मिट्टी हटाने वालों द्वारा प्रति भट्ठा प्रति वर्ष राज्य सरकार को देय समेकित स्वामित्व की राशि अधिसूचना संख्या 245/एम, दिनांक  27.01.2012 द्वारा पूर्व की अधिसूचना संख्या 27, दिनांक 23.03.2001 को संशोधन करते हुए निर्धारण किया गया है.
(घ) बिहार लघु खनिज नियमावली, 1972 में संशोधन - भारत सरकार के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायादे दिनांक 27.02.12 (दीपक कुमार इत्यादि नाम हरियाणा राज्य सरकार एवं अन्य) के अनुपालन में बिहार लघु खनिज समनुदान नियमावली,1972 में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्देशित सभी बिन्दूओं को समावेषित करते हुए अधिसूचना संख्या 3085/एम, दिनांक 11.08.2014 द्वारा बिहार लघु खनिज (संशोधन) नियमावली, 2014 को अधिसूचित कर दिया गया है.
(ड़) अवैध परिवहन एवं भण्डारण की रोक-थाम हेतु तथा अवैध क्रशर के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के उद्देश्य से बिहार खनिज (अवैध खनन,परिवहन एवं भण्डारण निवारण नियमावली, 2003) में भी आवश्यक संशोधन किया गया है. अधिसूचना संख्या 3084/एम, दिनांक 11.08.14 द्वारा संशोधित नियमावली यथा बिहार खनिज (अवैध खनन, परिवहन एवं भण्डारण निवारण) (संशोधन) नियमावली, 2014 को अधिसूचित किया जा चुका है.
(च) विभाग भ्रष्टाचार के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई कर रहा है. अभी तक 11 कर्मियों को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है एवं 3 सेवानिवृत कर्मियों के शत-प्रतित पेंन को जप्त किया गया है. इसके अलावा 22 अन्य कर्मियों पर अन्य दण्ड दिया गया है.
(छ) समूह-'घ' के कर्मियों का वरीयता सूची प्रकाशन की कार्रवाई की जा रही है.
(ज) खान निरीक्षक (श्रेणी-3) के 23 पदों पर सीधी नियुक्ति हेतु बिहार कर्मचारी चयन आयोग एवं खनिज विकास पदाधिकारी (श्रेणी-2,राजपत्रित) के 12 पदों पर सीधी नियुक्ति हेतु बिहार लोक सेवा आयोग को अधियाचना भेजी जा चुकी है.
(झ) बिहार लघु खनिज समनुदान नियमावली, 1972/2014 में संशोधन की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है.
(ट) MMDR Amendment Act, 2015 के अनुपालन में District Mineral Foundation Rules का प्रारूपण अन्तिम चरण में है. वृहद खनिज के पट्टेधारियों से National Mineral Exploration Trust में स्वामिस्व की 2 प्रतित राशि जमा कर इसकी सूचना खान मंत्रालय, केन्द्र सरकार को भेजी जा रही है.
(ठ) खनिज परिवहन हेतु ई-चालान लागू करने के लिए NIC द्वारा Software Develop करने की कार्रवाई की गई है एवं trial basis पर प्रत्येक जिला में एक बालू घाट चिन्हित कर इसे लागू करने की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है.
(ड) ईंट-भट्ठों से प्राप्त राजस्व पर प्रभावकारी नियंत्रण बनाये रखने हेतु Geo Mapping Application का प्रयोग करते हुए Mobile App विकसित की गयी है.
(ण) कार्य विभाग द्वारा व्यवहृत खनिजों से स्वामिस्व की शत-प्रतिशत वसूली के उद्देश्य से सभी कार्य विभागों को एक प्रपत्र तैयार कर योजनावार व्यवहृत लघु खनिजों तथा भुगतान किये गये स्वामिस्व का विवरण उपलब्ध कराने हेतु अनुरोध किया गया है.
(त) एक Project Management Unit का गठन प्रस्तावित है जिसमे विशेषज्ञों की सेवा संविदा पर लेकर अन्य महत्वपूर्ण कार्यो का सम्पादन किये जाने की योजना है.
(थ) केन्द्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा निर्गत अधिसूचना दिनांक 20.01.16 के अनुपालन में पर्यावरण एवं वन विभाग, बिहार सरकार द्वारा समरूप अधिसूचना DEAC एवं DEIAA के गठन के लिए निर्गत है जिसका सतत् अनुश्रवण किया जा रहा है.